Tag: आतंकवाद
पाक से पहली लड़ाई में परास्त
मुंबई पर आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पहले दौर का जो कूटनीतिक युद्ध शुरू हुआ था, उसमें भारत लगभग हार गया है. सामरिक भूमि में पाकिस्तान कहां ठहरता है यह तो बाद की बात है लेकिन आज की कूटनीतिक परिस्थितियों में पाकिस्तान अपने नौसिखिए नेताओं के भरोसे भी भारत पर हावी दिखाई देता है. यह भारत के राजनेताओं की ही नहीं बल्कि यहां के कूटनीतिज्ञों की भयावह हार है. मुंबई हमले से पहले खुफिया एजंसियों की नाकामयाबी सामने आयी थी तो हमले के बाद भारत का कूटनीतिक वर्ग पाकिस्तान के सामने बुरी तरह परास्त हो गया है....आधुनिक तकनीकि से लैस आतंकवाद
कंधे पर राकेट लांचर लादे, हाथों में राइफल संभाले, सिर पर पगड़ी बांधे, पुरानी जीपों में बैठकर बेकसूर लोगों को गोलियों का निशाना बनाते अर्धसाक्षर और धर्मांध जेहादियों का जमाना बीत चुका है। आज का आतंकवादी लंबा प्रशिक्षण प्राप्त आधुनिक युवक है जो जीन्स और कारगो पैंट पहने, पीठ पर असलहा भरे रकसैक लादे, फर्राटे से अंग्रेजी बोलने में सक्षम किसी फौजी कमांडो से कम नहीं है।...लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba)
मुंबई पर आतंकी हमले के बाद जमात-उद-दावा (Jama'at ud Dawa) और लश्कर-ए-तैयबा(Lashkar-e-Taiba) का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है. जमात पर प्रतिबंध का क्या कोई औचित्य है? लश्कर-ए-तोएबा पर भारत ने पिछले आठ साल से प्रतिबंध लगा रखा है. संयुक्त राष्ट्र, ब्रिटेन और खुद पाकिस्तान द्वारा पिछले पांच सालों से लश्कर-ए-तैयबा पर प्रतिबंध लगा हुआ है? नतीजा क्या है? प्रतिबंध के बाद लश्कर ने ज्यादा व्याहरिक होते जमात-उद-दवा के नाम से काम शुरू कर दिया. अब वह एक ऐसा जेहादी समूह बन गया है जिसका एक सामाजिक आधार है और जो आतंक के स्कूल ही नहीं चलाता अस्पतालों का भी संचालन करता है. ...मीडिया को मिली 'आतंकवाद' की संजीवनी
आतंकवाद और मंदी का आपस में कोई संबंध हो सकता है? चलिए इसमें एक कड़ी और जोड़ देते हैं-राजनीति. अब कोई संबंध बनता है? अभी भी पूरा संबंध नहीं बना है. इसलिए इसमें मीडिया को भी शामिल कर लेते हैं. अब पूरी कड़ी बन जाती है- मंदी के इस दौर में जब चारों ओर संकट के बादल छाये हैं ऐसे में भारत में आतंकवादी हमलों ने मीडिया और विज्ञापन एजंसियों को अपना व्यापार बनाये रखने का मौका दे दिया है. यह सब इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि राजनीतिक दल चुनाव मैदान में थे. ...'वे' सफल क्यों हुए?
मुंबई, लक्षद्वीप, पोरबंदर और कोंकण के तटों पर पिछले दो दशकों से सिर्फ और सिर्फ डी कंपनी का कब्जा है. 1993 में दुनिया में पहली बार श्रृंखलाबद्ध विस्फोट मुंबई में हुए थे. इन विस्फोटो में दाऊद की क्या भूमिका थी? आरडीएक्स पाकिस्तानी सेना ने दिया था, ट्रेनिंग पाकिस्तानी सेना ने दिया था. डी कंपनी ने लाजिस्टिक का सपोर्ट दिया था. प्रशिक्षण के लिए टिकट और वीजा उपलब्ध कराना तथा आरडीएक्स और एक-56 जैसी राईफलें को मुंबई तक लाने का काम भी डी कंपनी ने किया था....पाक मीडिया का पलटवारः हिन्दुओं ने कराया मुंबई पर हमला
27 नवंबर की सुबह अखबारों में एक फोटो छपी थी जो अजमल आमिर कसाव की थी. कसाब जिस हाथ में एक-47 लेकर आगे बढ़ रहा था उस हाथ में रक्षा सूत्र बंधा हुआ था. वही रक्षासूत्र जो आमतौर हिन्दू तीर्थों में भक्तों के हाथ में बांध दिया जाता है. हो सकता है उस दिन यह बात किसी ने नोटिस नहीं की लेकिन पाकिस्तान मीडिया ने पलटवार करने के लिए उसी तर्क को सामने रख दिया है. ...सबको पता था कि हमला होगा
मुंबई में आतंकी हमले की पूर्व आशंका नहीं बल्कि जानकारी थी. हम यहां ऐसे कुछ बयान दे रहे हैं जो हमारे देश के महत्वपूर्ण मंत्रालयों का जिम्मा संभालने वाले मंत्रियों ने समय-समय पर दिये थे. इन बयानों से साफ है कि मुंबई पर बड़े आतंकी हमले की जानकारी सबको थी. इतनी सटीक जानकारी होने के बावजूद हमारे प्रशासन ने कार्यवाही क्यों नहीं की?...आतंकी हमला हुआ कैसे?
अगर आप मुंबई पर हुए आतंकी हमले की तह में जाएं तो सरकारी एजंसियों द्वारा की गयी अंतहीन मनमानियां और लापरवाही सामने दिखाई देगी. मसलन, मार्च २००६ में अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश की यात्रा के बाद अल-कायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन का एक आडियो संदेश जारी हुआ था जिसमें लादेन ने यहूदियों, ईसाईयों और हिन्दुओं को निशाना बनाने की बात कही थी. इसके बाद ही पाकिस्तान और बांग्लादेश के दर्जनों आतंकी संगठन जो अलकायदा के तहत काम करते हैं उन्होंने भारत को निशाना बनाना शुरू कर दिया. लादेन की उस चेतावनी के बाद भारत सरकार को भी आतंक के खिलाफ राष्ट्रीय रणनीति पर काम शुरू करना चाहिए था....अलकायदा, लश्कर और दाऊद ने मिलकर किया हमला
अब यह बात ज्यादा साफ हो गयी है कि मुंबई पर हुए आतंकी हमले के पीछे अलकायदा, लश्कर और आईएसआई का हाथ है. जो शुरूआती सबूत मिले हैं उसके आधार पर विदेशमंत्री पहले ही पाकिस्तानी विदेश मंत्री को बता चुके हैं कि मुंबई पर हुए आतंकी हमले के तार पाकिस्तान से जुड़ रहे हैं. खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से बातचीत में साफ संकेत दिये हैं जिसका नतीजा है कि पाकिस्तानी आईएसआई के उप प्रमुख भारत आ रहे हैं. केवल पाकिस्तान ही नहीं बल्कि इजरायल और अमेरिका के भी खुफिया व्यूरो के अधिकारियों का जमावड़ा भारत में लगना शुरू हो गया है. ...अमीरी पर आतंकी हमले के बाद
हर बार आतंकी हमले के बाद भारत अब तक रस्मी प्रतिक्रिया ही देता आया है, सिर्फ दो अवसरों को छोड़कर. एक तब जब संसद पर आतंकी हमला हुआ था और एक अब जब मुंबई के मंहगे होटल और मंहगे लोगों को निशाना बनाया गया है. "इनफ इज इनफ" का मुहावरा इससे पहले कभी सुनने में नहीं आया. तब भी नहीं जब आसाम में सबसे भीषण आतंकी हमला हुआ. दुर्भाग्य से उस दिन भी मीडिया और प्रशासन के लिए साध्वी प्रज्ञा ही मुद्दा थी न कि असम में मारे गये सामान्य नागरिक. लेकिन चंद दिनों के अंतराल पर मुंबई में हुआ आतंकी हमला "इनफ इस इनफ" का जुमला चला देता है....- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
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