Home | बियाबान में शोर | हरिप्रसाद का लोकतंत्र 'हठ'

हरिप्रसाद का लोकतंत्र 'हठ'

image चित्र में हरिप्रसाद, एलेक्स हाल्डरमैन और रॉप गोन्ग्रिप…

हरिप्रसाद को एक हफ्ते तक पुलिस हिरासत में रखने के बाद जमानत मिल गयी है. जेल से छूटने के बाद हैदराबाद पहुंचे हरिप्रसाद ने कहा है कि वे इस गिरफ्तारी से न झुकेंगे न टूटेंगे बल्कि ईवीएम मशीनों की धोखाधड़ी के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेंगे. हरिप्रसाद की यह दिलेरी और लोकतंत्र के प्रति हठ निश्चित रूप से काबिले तारीफ है.

उल्लेखनीय है कि श्री हरिप्रसाद VETA (Citizens for Verifiability, Transparency and Accountability in Elections), के तकनीकी सलाहकार और शोधकर्ता हैं। हरिप्रसाद ने कई सार्वजनिक कार्यक्रमों और यू-ट्यूब पर बाकायदा इस बात का खुलासा किया है कि इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों को किसी एक खास पार्टी के पक्ष में "हैक" और "क्रैक" किया जा सकता है। हरिप्रसाद के साथ तकनीकी टीम में अमेरिकी विश्वविद्यालय के दो प्रोफ़ेसर और "एथिकल हैकर" शामिल हैं तथा इस बारे में चुनाव विशेषज्ञ (Safologist) श्री राव ने एक पूरी पुस्तक लिखी है। इन खुलासों के बाद लगता है कि कांग्रेस सरकार जो कि युवराज की ताजपोशी की तैयारियों में लगी है, घबरा गई है… और उसने समस्या का सही और उचित निराकरण करने की बजाय एक निरीह तकनीकी व्यक्ति को डराने के लिये उसे चोरी के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है।

मामले की शुरुआत तब हुई, जब तेलुगू चैनल पर एक कार्यक्रम के दौरान जब एक दर्शक ने उनके द्वारा प्रयोग करके दिखाई जा रही मशीन की वैधता पर सवाल किया तब उन्होंने उस मशीन का सीरियल नम्बर बता दिया। अब तक पिछले कुछ चुनावों में देश भर में लगभग 100 वोटिंग मशीनें चोरी हो चुकी हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने कभी इतनी फ़ुर्ती से काम नहीं किया जितना हरिप्रसाद के मामले में किया। चुनाव आयोग ने तत्काल मुम्बई सम्पर्क करके उस सीरियल नम्बर की मशीन के बारे में पूछताछ की और पाया कि यह मशीन चोरी गई मशीनों में से एक है, तत्काल आंध्रप्रदेश पुलिस के सहयोग से मुम्बई पुलिस ने हरिप्रसाद को EVM चोरी के आरोप में उनके घर से उठा लिया। चुनाव आयोग सन् 2008 से ही हरिप्रसाद से खुन्नस खाये बैठा है, जब उन्होंने EVM के फ़ुलप्रूफ़ न होने तथा उसमे छेड़छाड़ और धोखाधड़ी की बातें सार्वजनिक रुप से प्रयोग करके दिखाना शुरु किया।

1) चुनाव आयोग ने पहले तो लगातार इस बात से इंकार किया कि ऐसा कुछ हो भी सकता है
2) फ़िर जब हरिप्रसाद की मुहिम आगे बढ़ी तो आयोग ने कहा कि हरिप्रसाद जो हैकिंग के करतब दिखा रहे हैं वह मशीनें विदेशी हैं
3) हरिप्रसाद ने चुनाव आयोग को चैलेंज किया कि उन्हें भारत की वोटिंग मशीनें उपलब्ध करवाई जायें तो वे उसमें भी गड़बड़ी करके दिखा सकते हैं
4) चुनाव आयोग ने भारतीय ब्यूरोक्रेसी का अनुपम उदाहरण देते हुए उनसे कहा कि वोटिंग मशीनें उन्हें नहीं दी जा सकती, क्योंकि वह गोपनीयता का उल्लंघन है, और (बिना किसी विशेषज्ञ समिति के) घोषणा की, कि चुनाव आयोग को भरोसा है कि भारतीय वोटिंग मशीनें पूरी तरह सुरक्षित हैं
5) और आज जब हरिप्रसाद ने किसी बेनामी सूत्रों के हवाले से एक भारतीय वोटिंग मशीन प्राप्त करके उसका भी सफ़लतापूर्वक हैकिंग कर दिखाया है तो चुनाव आयोग ने उन्हें मशीन चोरी के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है (ये तो वही बात हुई कि भ्रष्टाचार उजागर करने वाले किसी स्टिंग ऑपरेशन के लिये, उस पत्रकार को ही जेल में ठूंस दिया जाये, जिसने उसे उजागर किया)।

हरिप्रसाद की गिरफ़्तारी चुनाव आयोग के उपायुक्त अशोक शुक्ला और EVM की गड़बड़ी जाँचने के लिये बनी समिति के चेयरमैन पीवी इन्द्रसेन के आश्वासन के बावजूद हुई। यह दोनों सज्जन वॉशिंगटन में आयोजित EVM टेक्नोलॉजी और इसकी विश्वसनीयता पर आधारित सेमिनार में 9 अगस्त को उपस्थित थे, जहाँ हरिप्रसाद के साथ प्रोफ़ेसर एलेक्स हाल्डरमैन भी थे और उस सेमिनार में वोटिंग मशीनों की हैकिंग के प्रदर्शन के बाद इन्होंने कहा था कि वे इस बात की जाँच करवायेंगे कि इन मशीनों में क्या गड़बड़ी है, लेकिन इस आश्वासन के बावजूद हरिप्रसाद को गिरफ़्तार कर लिया गया। इस सेमिनार में हारवर्ड, प्रिंसटन, स्टेनफ़ोर्ड विश्वविद्यालयों के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ ही माइक्रोसॉफ़्ट के अधिकारी भी मौजूद थे, और लगभग सभी इस बात पर सहमत थे कि इन मशीनों में गड़बड़ी और धोखाधड़ी की जा सकती है।

महाराष्ट्र पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये जाने के बाद एक ट्वीट में हरि प्रसाद ने कहा है कि - "मैं यह अपने मोबाइल से लिख रहा हूं, पुलिस ने मुझे गिरफ़्तार किया है और पुलिस पर भारी ऊपरी दबाव है। हालांकि नये मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस पूरे मामले को देखने का आश्वासन दिया है, लेकिन फ़िर भी मैं उस व्यक्ति का नाम ज़ाहिर नहीं कर सकता जिसने पूरे विश्वास से मुझे EVM मशीन सौंपी थी। मुझे अपने काम से पूरी सन्तुष्टि है और विश्वास है कि यह देशहित में है, मैं अपने देश से प्यार करता हूं और लोकतन्त्र को मजबूत करने के लिये जो भी किया जा सकता है, वह किया जाना चाहिये…"डॉ सुब्रह्मण्यम स्वामी ने खुलेआम सोनिया गाँधी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 2009 के आम चुनाव में विदेशी हैकर्स को भारी पैसा देकर अनुबन्धित किया, जो दिल्ली के पाँच सितारा होटलों में बड़े-बड़े तकनीकी उपकरणों के साथ ठहरे थे, और इसकी गहन जाँच होनी चाहिये…। उल्लेखनीय है कि जब पुलिस ने हरिप्रसाद को गिरफ़्तार किया उस समय न तो उन्हें आरोप बताये गये और न ही कोई केस दर्ज किया गया। श्री हरिप्रसाद की गिरफ़्तारी 21 अगस्त को हुई थी और मैंने किसी बड़े मीडिया समूह या चैनलों पर इस खबर को प्रमुखता से नहीं देखा, आपने देखा हो तो बतायें। आखिर मीडिया सरकार से इतना क्यों डरता है? यह डर है या कुछ और? तथा ऐसे में एक आम आदमी जो कुशासन, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था से लड़ने की कोशिश कर रहा हो, क्या उसकी हिम्मत नहीं टूटेगी? यह बात जरूर है कि हरिप्रसाद ने जिस अज्ञात व्यक्ति से सरकारी वोटिंग मशीन प्राप्त की है, वह एक अपराध की श्रेणी में आता है, क्योंकि वह निश्चित रुप से गोपनीयता कानून का उल्लंघन है, लेकिन चूंकि हरिप्रसाद की मंशा सच्ची है और वह लोकतन्त्र की मजबूती के पक्ष में है तो इसे माफ़ किया जा सकता है। एक बड़ा घोटाला उजागर करने के लिये यदि हरिप्रसाद ने छोटा-मोटा गुनाह किया भी है तो उसे नज़रअंदाज़ करके असली समस्या की तरफ़ देखना चाहिये, लेकिन सरकार "बाल की खाल" और खुन्नस निकालने की तर्ज़ पर काम कर रही है, और इससे शक और मजबूत हो जाता है।

जब चुनाव आयोग कह रहा है कि वह कुछ भी छिपाना नहीं चाहता, तब सरकार को हरिप्रसाद, हैकर्स और अन्य सॉफ़्टवेयर तकनीकी लोगों को एक साथ बैठाकर संशय के बादल दूर करना चाहिये, या किसी बेगुनाह शोधकर्ता को इस प्रकार परेशान करना चाहिये? आखिर चुनाव आयोग ऐसा बर्ताव क्यों कर रहा है? इन मशीनों को हरिप्रसाद ने सफ़लतापूर्वक चन्द्रबाबू नायडू, लालकृष्ण आडवाणी, ममता बनर्जी आदि नेताओं के सामने भी हैक करके दिखाया है, फ़िर भी विपक्ष की चुप्पी संदेह पैदा करने वाली है, कहीं विपक्षी नेता "कभी तो अपनी भी जुगाड़ लगेगी…" के चक्कर में चुप्पी साधे हुए हैं, यह भी हो सकता है कि उनकी भी ऐसी "जुगाड़" कुछ राज्यों के चुनाव में पहले से लग चुकी है? लेकिन लोकतन्त्र पर मंडराते खतरे का क्या? आम जनता जो वोटिंग के माध्यम से अपनी भावना व्यक्त करती है उसका क्या? पिछले 1 साल से जो तटस्थ गैर-राजनैतिक लोग वोटिंग मशीनों में हेराफ़ेरी और धोखाधड़ी की बात को सिरे से खारिज करते आ रहे थे, अब वे भी सोच में पड़ गये हैं।

Subscribe to comments feed Comments (2 posted):

sanjay modi on 03 September, 2010 21:43;16
avatar
chunav aayog bik chuka hai
Thumbs Up Thumbs Down
1
Tejas Joshi on 24 September, 2010 13:29;29
avatar
चुनाव आयोग बिक चूका है सीबीआई की तरह.
Thumbs Up Thumbs Down
0
total: 2 | displaying: 1 - 2

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image सुरेश चिपलूणकर उद्यमी, मुक्त पत्रकार और हिन्दी ब्लागर. उज्जैन के रहनेवाले सुरेश चिपलूणकर धाकड़ लिक्खाड़ हैं. लेखन शोधपूर्ण और तथ्यात्मक हो इसका भरपूर प्रयास करते हैं. अपने बारे में वे खुद कहते हैं कि "मैं सोचता हूँ कि कुछ न करने से बेहतर है कि "कुछ" किया जाये। संपर्क: suresh.chiplunkar@gmail.com
Rate this article
0
More from बियाबान में शोर
Previous
image
सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
image
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
image
रोम रोम में इरोम
कश्मीरी अलगाववादियों की तरह उसने आज तक अपने हाथ में कभी पत्थर नहीं उठाया. हालांकि उसका भी विरोध उसी बात को लेकर है जिसे लेकर कश्मीर में पत्थरबाजों की पूरी फौज सड़कों पर उतार दी गयी. पूर्वोत्तर में सशस्त्र सेना अधिनियम समाप्त किया जाए. इरोम शर्मिला विरोध कर रही है लेकिन उसका हथियार आंदोलन नहीं, आत्मोत्सर्ग है. पिछले दस साल से उसने अन्न त्याग कर रखा है. पुलिस और प्रशासन नाक की नलियों से पौष्टिक पदार्थ पहुंचाकर भले ही उसके शरीर को जिंदा रखे हुए हैं लेकिन उसे जब भी मौका मिलता है वह राजघाट जाती है और फफककर रोती है. शायद शर्मिला के सत्याग्रह को समझने के लिए देश में दूसरी कोई जगह बची भी नहीं है. ...
image
जिसके दर पर फाइल पहुंची, उसने रात गुजार ली
सपनों के शहर मुंबई के मुंह पर ऐसी कालिख शायद ही कभी लगी हो. मुंबई के कोलाबा स्थित आदर्श हाउसिंग सोसायटी की जैसी कहानी सामने आ रही है वह दिल दहला देनेवाली है. जिस शहर में इंच-सेन्टीमीटर में भी रहने की जगह का हिसाब रखा जाता हो वहां एक 31 मंजिला बिल्डिंग अवैध जमीन पर, अवैध तरीके से खड़ी कर दी गयी. भवन को खड़ा करने का यह भ्रष्टाचार उतना संगीन नहीं है जितना संगीन है यह समाचार कि यह भवन 1999 में कारगिल में शहीद जवानों की विधवाओं को आवासीय सुविधा देने के लिए तैयार किया जानेवाला था. कोलाबा के पास जिस स्थान पर यह भवन सीना तान खड़ा हुआ है उसकी हकीकत इतनी गंदी है कि किसी भी स्वाभिमानी नागरिक का सिर शर्म से झुक जाएगा. ...
image
बहुत बड़ा दुखारी है बुखारी
हाल में ही लखनऊ में एक पत्रकार को पीटकर अहमद बुखारी एक बार फिर चर्चा में आ गये. अहमद बुखारी ने लखनऊ में जिस पत्रकार को पीटा वह न तो किसी बड़े अखबार से जुड़ा था और न ही कोई बड़ा नाम था. लेकिन उस पत्रकार ने सवाल बड़ा किया था जिससे बौखलाकर बुखारी ने उसकी पिटाई कर दी थी. बुखारी का चरित्र यही रहा है कि वे हमेशा छोटे लोगों पर ही हाथ डालते हैं और उन्हें अपना शिकार बनाते हैं....
image
श्रीमान जी, मैं यशवंत सिंह भड़ास4मीडिया का संपादक और सीईओ हूं!
सेवा में, मानवाधिकार आयोग, दिल्ली / लखनऊ। श्रीमान, मैं यशवंत सिंह पुत्र श्री लालजी सिंह निवासी ग्राम अलीपुर बनगांवा थाना नंदगंज, जनपद गाजीपुर, उत्तर प्रदेश (हाल पता- ए-1107, जीडी कालोनी, मयूर विहार फेज-3, दिल्ली-96) हूँ. मैं वर्तमान में दिल्ली स्थित एक वेब मीडिया कंपनी भड़ास4मीडिया में कार्यरत हूं. इस कंपनी के पोर्टल का वेब पता www.bhadas4media.com है. मैं इस पोर्टल में सीईओ & एडिटर के पद पर हूं. इससे पहले मैं दैनिक जागरण, अमर उजाला एवं अन्य अखबारों में कार्यरत रहा हूँ. ...
image
कुछ तो समझे ख़ुदा करे कोई
जैसे-जैसे दिन गुज़रते जा रहे हैं वैसे-वैसे अयोध्या विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बैंच का फैसला भी प्रभावहीन होता जा रहा है। सुलह और समझदारी की बातें अब सौदेबाजी, अप्रत्यक्ष धमकियों व चेतावनी के रूप में सामने आ रही हैं। यही वजह है कि सभी पक्ष न्याय की अंतिम सीढ़ी सुप्रीम कोर्ट की ओर देख रहे हैं, वो भी जो फैसला आने पर दिखावटी रूप से खुश हुए और वो भी जो वास्तविक रूप में निराश हुए। देर सवेर फैसले को अपनी जीत बताने वालों के कंठ में दबे हुए विचार बाहर आने लगे हैं कि हाई कोर्ट ने विवादित भूमि का जो हिस्सा बंटवारा किया, वो अनुचित और अमान्य है अर्थात फैसला आने के बाद उदारता, सहिष्णुता के साथ शांति का प्रवर्तक बनने और दिखाने की जो तात्कालिक होड़ शुरू हुई थी, उसकी हवा निकल चुकी है।...
image
अजमेर विस्फोट का मारा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बेचारा
2007 में हुए अजमेर दरगाह विस्फोट में इंन्द्रेश कुमार का नाम आया है या फिर लाया गया यह तो अलग बहस का विषय है लेकिन मीडिया ने पिछले चौबीस घण्टे से इसे हाईप दिया है उसकी हकीकत क्या है? आखिर ऐसा क्या हुआ कि पिछले चौबीस घण्टे में मीडिया को अचानक संघ सबसे बड़ा आतंकी संगठन नजर आने लगा और चार्जशीट में सिर्फ नाम होने के नाम पर ही इन्द्रेश कुमार को आरोपी साबित करने में लग गया? क्या अजमेर शरीफ विस्फोट की जांच के बहाने संघ को ही उड़ाने की साजिश रची गयी है?...
image
गिलानी साहब, कश्मीर आजाद है!
यह बात सबकी समझ में आ जानी चाहिए कि कश्मीरी अवाम जिसे आज़ादी कहता है उसका मातलब भारत में विलय है और गिलानी टाइप पाकिस्तानी पैसे पर पलने वालों को यह हक नहीं है कि वे पाकिस्तान की तारीफ करते हुए कश्मीर की आज़ादी की बात करें क्योंकि पाकिस्तान ही कश्मीर की आज़ादी का असली दुश्मन है....
image
बुखारी को सबक सिखाना जरूरी
शाही इमाम द्वारा यह कृत्य जाहिर करता है कि बाबरी मस्जिद प्रकरण को रंग रोगन देने में वो जो चाह रहें है वो लोगों के गले नही उतर रहा है जिसके चलते वे खुद को आज की तारीख में हाशिए पर खड़ा महसूस कर रहे है ऐसे में बुखारी जी की बौखलाहट बढ़ गई है. वे इस मामले को तूल देकर मुख्यधारा में आने के लिए छटपटा रहे हैं किन्तु गिरगिट की भांति रंग बदलने वाले इन धार्मिक आकाओं की बातों पर जनता कोई खास तवज्जो नही दे रही है अलबत्ता लोग यह जरुर कह रहें है कि इस मामले पर अब अवाम राजनीति की और रोटियां नही सिकने देगी। अब वक्त आ गया है कि बुखारी जैसे आकाओं को जनता सबक सिखाए ताकि आगे ये इस तरह की गलती न दोहरा सकें....
image
अभिव्यक्ति की आजादी पर बुखारियों के वंशजों का कब्ज़ा
शाही इमाम सैयद अहमद शाह बुखारी नाराज हैं. उन्होंने वहीद को काफिर कहा और पीट दिया. बस चलता तो उसके सर कलम करने का फतवा जारी कर देते. हो सकता है कि एक दो दिनों में कहीं से कोई उठे और उसके सर पर लाखों के इनाम की घोषणा कर दे. वो मुसलमान था उसे ये पूछने की जुर्रत नहीं होनी चाहिए थी कि क्यूँ नहीं अयोध्या में विवादित स्थल को हिन्दुओं को सौंप देते? वैसे मै हिन्दू हूँ और मुझमे भी ये हिम्मत नहीं है कि किसी से पूछूं क्यूँ भाई कोर्ट के आदेश को सर आँखों पर बिठाकर इस मामले को यहीं ख़त्म क्यूँ नहीं कर देते? मैं ऐसा इसलिए नहीं पूछ सकता क्योंकि मै जानता हूँ ऐसे सवालों के अपने खतरे हैं....
image
सेकुलरिज़्म ऐसा है तो फिर हिन्दू राष्ट्र में बुराई क्या?
हमारे संचार माध्यमों में प्रतिदिन सर्वाधिक सुर्खियों में रहने वाला शब्द 'धर्म निरपेक्षता’ ही है। बाबरी मस्जिद विवाद पर अदालत का फैसला आने के बाद अब ये हर एक की जुबान पर है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखपत्र 'पांचजन्य’ के सम्पादक तरुण विजय का एक लेख नज़र से गुजरा। जिस में उन्होंने लिखा है कि ''अयोध्या पर फैसला आने के बाद 'सेकुलर’ समझ नहीं पा रहे हैं कि कुछ तनाव, झगड़ा और मारकाट तो हुई नहीं इसलिये अब कैसे अपने झंडे उठाए और अमन की मोमबत्तियां जला कर रखें।...
image
मुसलमान ही बताएं वे इस देश में कैसे रहेंगे?
बाबरी ढाँचे-राम जन्मभूमि मुकद्दमे के फैसले और कश्मीर में समस्या के समाधान की दिशा में सक्रियता दिखाने की बजाय हिन्दुस्तान में कश्मीर के विलय के सन्दर्भ में अनाप-शनाप बयान जारी करने की ओमर अब्दुल्ला की शेखचिल्ली वृत्ति के चलते एक बार फिर इस देश में पिछले ७ दशकों से जारी हिन्दू-मुस्लिम विभाजन कारी वृत्ति को हवा मिली है. सनद रहे कि इस उपमहाद्वीप को पिछले कई दशकों को धर्म के आधार पर बुरी तरह से विभाजित किया गया है....
image
आडवाणी जी "कलंकयात्रा'' थी आपकी रथयात्रा
लालकृष्ण आडवाणी का यह कहना कि अयोध्या पर हाईकोर्ट के फैसले से उनकी रथ यात्रा सार्थक साबित हुई है, उन हजारों मुसलमानों और हिन्दुओं के जख्मों पर नमक छिड़का है, जो उनकी रथयात्रा के चलते प्रभावित हुए थे। आडवाणी का यह बयान उन मुसलानों को भी आहत करने वाला है, जो यह सोचते हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को अंतिम मानकर अब अयोध्या विवाद का पटाक्षेप हो जाना चाहिए। ऐसा चाहने वाले मुसलमानों के दिल में यह बात आ सकती है कि नहीं, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ा जाना चाहिए। पता नहीं कैसे आडवाणी अपनी रथयात्रा को सार्थक बता रहे हैं। सच तो यह है कि आडवाणी की वह रथयात्रा इस देश पर एक कलंक और एक तरह से 'खूनी यात्रा' थी।...
image
सेकुलर बिरादरी के सिर पर न्याय का हथौड़ा
अयोध्या में रामजन्मभूमि पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद कल तक जो न्यायालय के फैसले को मानने का उपदेश दे रहे थे अब वे ही न्यायपालिका के फैसले पर छिद्रान्वेषण करने निकल पड़े हैं. इस देश का सबसे बड़ा संकट है कि इसके बुद्धिजीवी उसी को ज्यादा कसौटी पर कसते हैं जिसकी सहिष्णुता को लेकर उन्हें पूरा विश्वास होता है. हिन्दू समाज दुनिया का सबसे सहिष्णु समाज है सो जिसे देखो वही उसके खिलाफ इल्जामों की सूची लिए खडा है. क्या किसी अन्य धर्मावलम्बी से उसकी आस्था के किसी प्रतीक चिह्न के मामले में इस तरह सबूत मांगे जा सकते हैं? जिसे देखो वही पूछ ले रहा है कि कैसे यह साबित किया जा सकता है कि राम अयोध्या में ही जन्मे थे और उसी स्थान पर जिस पर बाबरी ढांचा कभी मौजूद होता था?...
image
आपके गाँव में इसे फैसला कहते होंगे
बाबरी मस्जिद की ज़मीन का फैसला आ गया है . इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपना आदेश सुना दिया है .फैसले से एक बात साफ़ है कि जिन लोगों ने एक ऐतिहासिक मस्जिद को साज़िश करके ज़मींदोज़ किया था, उनको इनाम दे दिया गया है....
image
एक बार फिर आग लगाने की कोशिश
भाजपा के नेता लालकृष्ण आडवाणी एक बार फिर राम नाम का सहारा लेकर मैदान में उतर गए हैं। यह अच्छा हुआ कि बाबरी मस्जिद विवाद के मालिकाना हक का फैसला कुछ दिन के लिए टल गया है। अब समझ आ गया है कि भाजपा की चुप्पी दरअसल घात लगाने की मुद्रा भर थी। फैसला आते ही उसकी हरकतें नब्बे के दशक जैसी हो जाती और देश को एक बार फिर साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने की नाकाम कोशिश की जाती। अब राममंदिर मुद्दे को दोबारा सड़कों पर लाने की बात करके भाजपा न्यायपालिका को ब्लैकमेल करना चाहती है।...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2